Sunday, 22 August 2021

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वो कहते हैं  चौपालों पर आज नण अफसाने हैं,

सुनानाम बदले हैं  जेकिन किस्सेे वही पुराने हैं।/

अंधों की सत्ता में मिलती नहीं रेबडी उनको ही,

जो खुद अंधे हैं याअंधों से  उनके याराने हैं।

पगडंडी पर बिछी हुईं  हैं अपनी नजरे बरसों से,

लेकिन शै  वो नजर न आजी, जिसके हम दीवाने हैं।

फिर से अबकी बार दूर से ,सभाी बहारें  गुजर गईं,

किसे पता है मौसम कया− क्या अपने मन में ठानेे है। 

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न  हम सफर,न किसी हमनशीं से निकलेगा,

हमारे पांव को कांटा,हमी से निकलेगा ।

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तुम्हारी याद ने बेचैन, मुझको रात भर रखा,

कभी तकिया इधर रखा, कभी तकिया उधर रखा।

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जलों अरूणिमा, इस नगरी में कोई अपना रहा नही,

इस नगरी के आईनों में अब सब चेहरे अनजाने हैं।

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नैनाअंतर आव तू,पलक झापिं तोहि लेहूं,

न मैं देखूें और को, तुणे न देखन देहूं। 

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चली गई है को ई श्यामा,

आख बचाकर नदी नहाकर,

कांप  रहा है, अब तक व्यकुल ,

विकल नील जल।

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इकलाचांद असंख्य तारें,

नील गगन के खुले किवाड़े।

को हमकों कहीं पुकारे ,

हम आंएगे , वाहं पसारे।

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नही फुरसत यकीं जानों, हमें कुछ और करने की,  

तेरी बाते, तेरी यादें,बहुत मशरूफ रखती हैं।

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हमने तमाम उम्र अकेले सफर किया।

हम पर किसी खुदा की इनायत नही रही।

हिम्मत से सच कहूं, तो बुरा मानते हैं,

रो− रो के बात करने की आदत नही रही। 

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लिखी गईं है, हमारे लहूं से ही सुर्खियां,

लेकिन हमी खबर से अलग कर दिये गए।

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दीवारों पर ही दसतक देते रहिए,

दीवारों से ही रस्ते निकलेंगे।

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सूफी − संत चले गए, सब जंगल की ओर,

मंदिर मशृजिद में मिलें,रंग , बिरंगे चोर।

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तुम्हारे शहर के सारे दिए तो  सो गए लेकिन,

हवा से पूछना ,  दहलीज पर ये कौन जलता है।  

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मेरे चेहरे पे वख्त की निशानियां हैं बहुत,

चख्त जहां ठहरा, सलबट सी पड़ गईं।

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लगा दो आग पानी में ,शरारत हे तो ऐसी हो,

मिटा  दो जुल्म की हस्ती, बगावत हो तो ऐसी हो।

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निकट दूर हों ,  जहां भाी अपने हों सानन्द,

यही मनाते देव से झूमें गाए छंद।

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ये कैंचियां क्या  खाकर काटेंगी पर हमारे,

हम परों से नहीं ,हौंसलों से उड़ान भरते हैं।

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तेार दुनिया का ये दस्तूर भी, अजब हैं खुदाया,

मुहब्बत उनको मिलती है, जिन्हें करनी नही आती।  

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गजल

पहले तो अपने आप से नजरें मिलाइये,

फिर चाहे हमपे शौक से तोहमत लगाइये।

 मेहनत की भट्टियों में झुलसना तो छोडि़ए,

रिश्तों की आंच में जरा तपकर दिखाईए।

औरत हूूं , आइना नही, जो टूट जाउंगी ,

इन पत्थरों से और किसी को डराइए।

बनना है गर अमीर तो बस इतना कीजिए,

जिस्मों की कच्र खोदके किडनी चुराइए।

अशआर तो होते ही, सुनाने के लिए हैं,

लेेकिन हया के साथ  इन्हें गुन गुनाइए ।

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बिना तेरे मुझे, धड़कन  थमी  महसूस होती है,

मेरी आंखखों में जाने क्यूं , नमी महसूस होती है।

तराना है, कहानी है, जमाना है, जवानी है,

मगर मगर भी मुझे तेरी, कमी महसूस होती है।

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कब कहता हूं मैं वेाअच्छा बहुुत है,

मगर उसने मुझे चाहा बहुत है।

खुदा इस शहर को महफूज रखे,

ये बचचों की तरह हंसता बहुुत है।  

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तू अगर इश्क में बरबाद नही हो सकता,

 जा तुझे कोई सबक , याद नही हो सकता।

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दिलों की  सांकले और जहन की कुंडियां खोलो,

बड़ी भारी घुटन है, द्वा्र खोलो,  खिड़कियां खोलो।

कसी मुट्ठी  को लेकर आए हो, गुससे में हो शायदा,

मिलाना है जो हमसे हाथ, तो ये मुट्ठियां खाेलो।

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करो न फिक्र, जरूरत पड़ी  तो हम देंगे,

जिगर का खून,चरागोां में डालने के लिए।

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बारिशाे के जोर से वो फिर जमी पर आ गए,,

वरन कुछ जर्रे जमी कें,आसमां बनने को थे।

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फूलों −फलों दुनियां मे सदा शाद रहो तुम,

दुनिया रहे आबाद और आबाद रहो तूम।

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जुगनुओं तुमने बहुत की है, बुराई मेरी,

छिड़ ना जाए कहीं, सूूरज से लडा़ई मेरी। 

मेरे होठों से कभी  दर्द न छलका मेरा,

मेरी आंखों को कभी नींद न आई मेरी।

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किसी के एक आंसू पर , हजारों ंदिल तड़पते हैं,

किसी का उम्र भर रोना, यूं ही बेकार जाताहै

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यूं दिल पे हरेक रात भारी रही,

रोशनी के लिए जंग जारी रही।

उनके परचम भले ही दिलो ंपर रहे, 

पर दिलों पर हुकूमत हमारी रही।

ये कैसी अनहोनी मालिक,ये कैसा संजोग।

कैसा−कैसी कुर्सियां ,कैसे − कैसे लोग।

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मुहब्बत में बुरी नीयत से कुछ साेचा नही जाता,

कहा जाता है उसको बेवफा,समणानही जाता।

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तूफान में कश्ती को किनारे भी मिलेंगे,

जहां में  लोगों को सहारे भी मिलेंगे।

दुनिया में सबसे प्यारी है  जिंदगी,

कुछ लोग जिंदगी से, प्यारे भी मिलेगे।  


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