Friday, 13 May 2016

होता नहीं है फैसला सिक्का उछाल के,
ये दिल का मामला है, जरा देख भाल के ।
मोबाइल के दौर के आशिकों को क्या पता,
खत में रख देते थे, दिल निकाल के ।

Thursday, 12 May 2016

जाने क्या ढूंढती है मेरी मुस्कराहट तुझ में..!!
जो तू हंसती हैं, ये कम्बखत मेरे होंठो पे आ बैठती।
टींन्कू मंडिरा की फेस बुक वाल से
बहुत देर कर दी तुमने मेरी धड़कने महसूस करने में।
वो दिल नीलाम हो गया जिसपे तुम्हारी हुकूमत थी।।
मीनू गुप्ता की फेसबुक वॉल से

Monday, 2 May 2016

अधूरेपन का मसला ज़िंदगी भर हल नहीं होता,

कहीं आँखें नहीं होतीं, कहीं काजल नहीं होता।


कहानी कोई भी अपनी भला पूरी करे कैसे?


किसी का आज खोया है, किसी का कल नहीं होता।


- राजन स्वामी


रविन्द्र श्री वास्तव जी की फेसबुक वाल से 

Sunday, 1 May 2016

सात संदूकों में भरकर दफन कर दो नफ़रतें,

आज इंसान को मोहब्बत की ज़रूरत है बहुत...

सुभाष बंसल  की फेसबुक वॉल से
दिल से ज्यादा महफूज़ जगह नहीं दुनिया में,

पर सबसे ज्यादा लोग लापता भी यहीं से होते हैं।

निशांन्त शर्मा की फेसबुक वॉल से
 जब से देना शुरू किया उनके सवालों के जवाब

आँखों में आँखें डालकर बात की,




मांगने लगे अपना हक़.

खेतों में बंद कर दिया हल जोत
ना,


उठने लगीं बंदूकें उनकी

देशभक्त और राष्ट्रद्रोह की खींचतान में

‘सरकार’ के लिए हम नक्सली हो गए।

सुधा उपाध्याय