Saturday, 23 July 2016

ना जाने क्या कहा था
डूबने वाले ने समंदर से,
कि लहरें आज तक
साहिल पे अपना सर पटकती हैं।

Thursday, 7 July 2016

हमारी... ईद होती है.

वतन की सरज़मीं पर ही किया करते हैं हम सजदे

हमें अपने फलक पर नूर-ए-हक़ की दीद होती है.


हमारे ही वतन की सरहदों में चांद जब आए

हमारा... जश्न होता है... हमारी... ईद होती है.

-शाहिद मिर्ज़ा शाहिद