Sunday, 16 November 2014

अपनी बात



अमरीका में रहते कुछ काम नहीं  था । पढ़ने का समय खूब था । खूब पढ़ा । कुछ रचनाए बहुत पसंद आई । डायरी कितनी बनाता । इसलियें ये ब्लॉग बना दिया  । इसमे मुझे जहाँ से जो पसंद आया लिया और जिसने फेस बुक पर या कहीं और पोस्ट किया था , डाल   दिया । डालने वाले का नाम भी दिया |

अशोक मधुप  

शेर 

अधूरे सच का बरगद हूँ किसी को ज्ञान क्या दूगां ,
मगर  मुद्दत से एक गोतम मेरे साए में रहता हैं।

महेश कुमार मिश्रा